नई दिल्ली: 18 फरवरी से शुरू हो रही 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं से पहले सीबीएसई ने बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए सप्लीमेंट्री (इंप्रूवमेंट) परीक्षा के नियमों में अहम बदलाव किया है। नए नियम लागू होने के बाद देशभर के लाखों परीक्षार्थियों को सीधे तौर पर असर झेलना पड़ेगा। अब छात्रों को पहले जैसी लचीलापन नहीं मिलेगा।
रिजल्ट के तुरंत बाद केवल एक विषय में सुधार का मौका
सीबीएसई की नई गाइडलाइन के मुताबिक, 12वीं के छात्र रिजल्ट जारी होने के तुरंत बाद सिर्फ एक ही विषय में सप्लीमेंट्री या इंप्रूवमेंट परीक्षा दे सकेंगे। पहले छात्रों को मुख्य परिणाम आने के करीब दो महीने के भीतर एक से अधिक विषयों में अंक सुधारने का अवसर मिलता था।
अब बोर्ड ने इस सुविधा को सीमित करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि तत्काल सुधार का विकल्प केवल एक विषय तक ही रहेगा।
एक से अधिक विषयों के लिए अगले साल देनी होगी मुख्य परीक्षा
अगर कोई छात्र दो या उससे अधिक विषयों में अपने अंक सुधारना चाहता है, तो उसे अगले वर्ष आयोजित होने वाली मुख्य बोर्ड परीक्षा में शामिल होना होगा। यानी अब एक से ज्यादा विषयों में सुधार के लिए तुरंत सप्लीमेंट्री परीक्षा देने की सुविधा खत्म कर दी गई है।
इस फैसले से उन छात्रों को ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा जो कई विषयों में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाना चाहते हैं।
15 जुलाई 2026 को संभावित सप्लीमेंट्री परीक्षा
बोर्ड ने 2026 की परीक्षाओं का संभावित कार्यक्रम भी साझा किया है। जानकारी के अनुसार, 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम मई 2026 में जारी किया जाएगा। इसके बाद सप्लीमेंट्री परीक्षा के लिए विस्तृत सर्कुलर जारी कर आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
फिलहाल, 12वीं के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा की संभावित तिथि 15 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
छात्रों की रणनीति पर पड़ेगा असर
सीबीएसई के इस फैसले के बाद छात्रों के पास मुख्य परीक्षा के बाद अंक सुधारने के अवसर सीमित हो गए हैं। यदि किसी छात्र के एक से अधिक विषयों में कम अंक आते हैं, तो उसे अगला पूरा शैक्षणिक वर्ष दोबारा मुख्य परीक्षा की तैयारी में लगाना पड़ सकता है।
ऐसे में छात्रों के लिए जरूरी है कि वे बोर्ड परीक्षा की तैयारी पूरी गंभीरता और रणनीति के साथ करें, ताकि भविष्य में किसी अतिरिक्त दबाव से बचा जा सके।